Bhagini Nivedita - Yaad karo Kurbani
RADIO AZAD HIND 90.8 FM

Bhagini Nivedita - Yaad karo Kurbani

Oct 28, 2022
57:13
S4 · E78
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About this episode

भगिनी निवेदिता का मूल नाम 'मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल' था। वे एक अंग्रेज-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, शिक्षक एवं स्वामी विवेकानन्द की शिष्या थीं। भारत में आज भी जिन विदेशियों पर गर्व किया जाता है उनमें भगिनी निवेदिता का नाम पहली पंक्ति में आता है, जिन्होंने न केवल भारत की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले देशभक्तों की खुलेआम मदद की बल्कि महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। भगिनी निवेदिता का भारत से परिचय स्वामी विवेकानन्द के जरिए हुआ। स्वामी विवेकानन्द के आकर्षक व्यक्तित्व, निरहंकारी स्वभाव और भाषण शैली से वह इतना प्रभावित हुईं कि उन्होंने न केवल रामकृष्ण परमहंस के इस महान शिष्य को अपना आध्यात्मिक गुरु बना लिया बल्कि भारत को अपनी कर्मभूमि भी बनाया। 1884 में उन्होंने शिक्षिका के रूप में नौकरी की, और अध्यापन कार्य करने लगी। 1892 में विम्बल्डन में ‘रस्किन स्कुल’ नाम से स्कूल की स्थापना की। वहाँ नये प्रकार की शिक्षा मिलती थी। 1895 में स्वामी विवेकानंद इंग्लैंड गये तब उनके चिंतन से और नये जमाने के लिये बहुत उपयुक्त ऐसे विचारों से भरे व्याख्यान से मार्गरेट नोबल प्रभावित हुयी। 28 जनवरी 1898 को मार्गरेट नोबल भारत आयी। बाद में 25 मार्च 1898 को स्वामी विवेकानंद ने उनको विधि के साथ ‘ब्रम्हचारिणी’ व्रत की दीक्षा देकर उनका नाम ‘निवेदिता’ रखा। और वो आगे चल के मार्गारेट नोबल इन्होंने सच कर दिखाया। इसी साल कोलकाता मे ‘निवेदिता बालिका विद्यालय’ की स्थापना उन्होंने की। 1899 में कोलकाता में आये प्लेग रोग की महामारी में उन्होंने खुद की जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की। रामकृष्ण मिशन को मदद दिलाने के लिये उन्होंने इंग्लैंड, फ्रान्स, अमेरिका आदि देशों की यात्रा की। 1902 में पुणे जाकर देश के लिये शहादत किये हुवे चाफेकर बंधु के माता के चरण स्पर्श कर उनके कदमों की धूल उन्होंने अपने सिर पर लगाई। 1905 को बनारस में हुवे राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में उन्होंने हिस्सा लिया।

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Radio Azad
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