Bhai Parmanand - Azad Hind
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Bhai Parmanand - Azad Hind

Dec 8, 2022
25:19
S10 · E64
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About this episode

भाई परमानन्द भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी थे। भाई जी बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी थे। वे जहाँ आर्यसमाज और वैदिक धर्म के अनन्य प्रचारक थे, वहीं इतिहासकार, साहित्यमनीषी और शिक्षाविद् के रूप में भी उन्होंने ख्याति अर्जित की थी। सरदार भगत सिंह, सुखदेव, पं॰ राम प्रसाद 'बिस्मिल', करतार सिंह सराबा जैसे असंख्य राष्ट्रभक्त युवक उनसे प्रेरणा प्राप्त कर बलि-पथ के राही बने थे। देशभक्ति, राजनीतिक दृढ़ता तथा स्वतन्त्र विचारक के रूप में भाई जी का नाम सदैव स्मरणीय रहेगा। आपने कठिन तथा संकटपूर्ण स्थितियों का डटकर सामना किया और कभी विचलित नहीं हुए। आपने हिंदी में भारत का इतिहास लिखा है। इतिहास-लेखन में आप राजाओं, युद्धों तथा महापुरुषों के जीवनवृत्तों को ही प्रधानता देने के पक्ष में न थे। आपका स्पष्ट मत था कि इतिहास में जाति की भावनाओं, इच्छाओं, आकांक्षाओं, संस्कृति एवं सभ्यता को भी महत्व दिया जाना चाहिए। आपने अपने जीवन के संस्मरण भी लिखे हैं जो युवकों के लिये आज भी प्रेरणा देने में सक्षम हैं। भाई जी का जन्म ४ नवम्बर १८७६ को जिला झेलम (अब पाकिस्तान में स्थित) के करियाला ग्राम के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिताजी का नाम भाई ताराचन्द्र था। इसी पावन कुल के भाई मतिदास ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर जी के साथ दिल्ली पहुँचकर औरंगजेब की चुनौती स्वीकार की थी। सन् १९०२ में भाई परमानन्द ने पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और लाहौर के दयानन्द एंग्लो महाविद्यालय में शिक्षक नियुक्त हुए। भारत की प्राचीन संस्कृति तथा वैदिक धर्म में आपकी रुचि देखकर महात्मा हंसराज ने आपको भारतीय संस्कृति का प्रचार करने के लिए अक्टूबर, १९०५ में अफ्रीका भेजा। डर्बन में भाई जी की गांधीजी से भेंट हुई। अफ्रीका में आप तत्कालीन प्रमुख क्रांतिकारियों सरदार अजीत सिंह, सूफी अंबाप्रसाद आदि के संर्पक में आए। इन क्रांतिकारी नेताओं से संबंध तथा कांतिकारी दल की कारवाही पुलिस की दृष्टि से छिप न सकी। अफ्रीका से भाई जी लन्दन चले गए। वहाँ उन दिनों श्री श्यामजी कृष्ण वर्मा तथा विनायक दामोदर सावरकर क्रान्तिकारी कार्यों में सक्रिय थे। भाई जी इन दोनों के सम्पर्क में आये। भाई जी सन् १९०७ में भारत लौट आये। दयानन्द वैदिक महाविद्यालय में पढ़ाने के साथ-साथ वे युवकों को क्रान्ति के लिए प्रेरित करने के कार्य में सक्रिय रहे। सरदार अजीत सिंह तथा लाला लाजपत राय से उनका निकट का सम्पर्क था। इसी दौरान लाहौर पुलिस उनके पीछे पड़ गयी। सन् १९१० में भाई जी को लाहौर में गिरफ्तार कर लिया गया। किन्तु शीघ्र ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद भाई जी अमरीका चले गये। वहाँ उन्होंने प्रवासी भारतीयों में वैदिक (हिन्दू) धर्म का प्रचार किया। वहाँ मार्तनक उपनिवेश (Martinique) में आपकी प्रख्यात क्रांतिकारी लाला हरदयाल से भेंट हुई। भारत में क्रांति कराने के लिए प्रमुख कार्यकर्ताओं के दल को यहाँ संघटित किया जा रहा था। लाला हरदयाल की प्रेरणा से आप भी इस दल में सम्मिलित हो गए। करतार सिंह सराबा, विष्णु गणेश पिंगले तथा अन्य युवकों ने उनकी प्रेरणा से अपना जीवन भारत की स्वाधीनता के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। १९१३ में भारत लौटकर भाई जी पुन: लाहौर में युवकों को क्रान्ति की प्रेरणा देने के कार्य में सक्रिय हो गये। भाई परमानन्द ने दक्षिण अमेरिका के कई ब्रिटिश उपनिवेशों का दौरा किया और लाला हरदयाल से सान फ्रैंसिस्को में पुनः मिले। गदर पार्टी के संस्थापकों में वे भी शामिल थे। सन् १९१४ में एक व्याख्यान यात्रा के लिये वे लाला हरदयाल के साथ पोर्टलैण्ड गये तथा गदर पार्टी के लिये 'तवारिखे-हिन्द' (भारत का इतिहास) नामक ग्रंथ की रचना की। भाई जी द्वारा लिखी पुस्तक "तवारीखे-हिन्द" तथा उनके लेख युवकों को सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित करते थे। भारत में क्रांति करने के उद्देश्य (तथाकथित 'गदर षडयन्त्र') से वे भारत लौट आये। उन्होने दावा किया था कि उनके साथ पाँच हजार क्रांतिकारी (गदरी) भारत आये थे। गदर क्रान्ति के नेताओं में वे भी थे। उनको पेशावर में क्रान्ति का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया गया था। २५ फ़रवरी १९१५ को लाहौर में गदर पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ भाई जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके विरुद्ध अमरीका तथा इंग्लैण्ड में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध षड्यन्त्र रचने, करतार सिंह सराबा तथा अन्य अनेक युवकों को सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित करने, आपत्तिजनक साहित्य की रचना करने जैसे आरोप लगाकर फाँसी की सजा सुना दी गयी। सजा का समाचार मिलते ही देशभर के लोग उद्विग्न हो उठे। अन्तत: भाई जी की फाँसी की सजा रद्द कर उन्हें आजीवन कारावास का दण्ड देकर दिसम्बर, १९१५ में अण्डमान (काला पानी)

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