Birsa Munda - Yaad Karo Kurbani
RADIO AZAD HIND 90.8 FM

Birsa Munda - Yaad Karo Kurbani

Nov 15, 2022
37:32
S4 · E88
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About this episode

बिरसा मुण्डा का जन्म 15 नवम्बर सन् 1875 में एक छोटे तथा गरीब किसान परिवार में हुआ था। छोटा नागपुर पठार में निवास करने वाले मुंडा एक जनजातीय समुदाय का हिस्सा हैं। जल,जंगल,जमीन तथा अपने कुटुम्ब व मुंडारी पहचान की रक्षा करने हेतु युवा बिरसा मुंडा ने सन् 1895 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ 'उलगुलान' का आगाज कर दिया और ब्रिटिश सरकार के सैनिकों को ‘नाकों चने चबाने’ को विवश किया। फलस्वरूप बिरसा मुंडा को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर तत्कालीन बिहार के हजारीबाग (अब झारखंड में) जेल तथा बाद में रांची कारागार में बंद कर दिया, जहां उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के कारण सन् 1900 ई को केवल 25 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा अपने माटी की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। बिरसा मुंडा के इस बलिदान के कारण उन्हें भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के जनजातीय विद्रोहों तथा क्रांति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है और इसलिए उन्हें 'भगवान'बिरसा मुंडा कहा जाने लगा इनका जन्म मुंडा जनजाति के गरीब परिवार में पिता-सुगना पुर्ती(मुंडा) और माता-करमी पुर्ती(मुंडा) के सुपुत्र बिरसा पुर्ती (मुंडा) का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गाँव में हुआ था। जो निषाद परिवार से थे, साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढाई के बाद इन्होंने चाईबासा जी0ई0एल0चार्च(गोस्नर एवंजिलकल लुथार) विद्यालय में पढ़ाई किये थे। इनका मन हमेशा अपने समाज में लगा रहता था। ब्रिटिश शासकों द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचते रहते थे। उन्होंने मुण्डा|मुंडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिये अपना नेतृत्व प्रदान किया। 1894 में मानसून के छोटा नागपुर पठार, छोटानागपुर में असफल होने के कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। बिरसा ने पूरे मनोयोग से अपने लोगों की सेवा की

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