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दामोदर हरि चापेकर , बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर सगे भाई थे जिन्होने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया। तीनों भाइयों को संयुक्त रूप से चापेकर बन्धु कहा जाता है। दामोदर हरि चाफेकर ने २२ जून १८९७ को रैंड को और उसके सहायक लेफ्टिनेंट आयस्टर को गोली मारकर हत्या कर दी। यह भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्रथम क्रांतिकारी धमाका था। [1] रैण्ड ने प्लेग समिति के प्रमुख के रूप में पुणे में भारतीयों पर बहुत अत्याचार किए थे। इसकी बालगंगाधर तिलक एवं आगरकर जी ने भारी आलोचना की जिससे उन्हें जेल में डाल दिया गया। ये तीनों भाई लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के सम्पर्क में थे। तीनों भाई तिलक जी को गुरुवत् सम्मान देते थे।
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Episode Details
- Author
- Radio Azad
- Show Type
- full
- Audio Format
- audio/mpeg
