Dada Bhai Noroji - Azad Hind
RADIO AZAD HIND 90.8 FM

Dada Bhai Noroji - Azad Hind

Sep 4, 2022
24:19
S10 · E36
-(0)

About this episode

दादाभाई नौरोजी (4 सितम्बर 1825 -- 30 जून 1917) ब्रिटिशकालीन भारत के एक पारसी बुद्धिजीवी, शिक्षाशास्त्री, कपास के व्यापारी तथा आरम्भिक राजनैतिक एवं सामाजिक नेता थे। उन्हें 'भारत का वयोवृद्ध पुरुष' (Grand Old Man of India) कहा जाता है। १८९२ से १८९५ तक वे युनाइटेड किंगडम के हाउस आव कॉमन्स के सदस्य ( एम पी) थे • आधुनिक भारतीय अर्थशास्त्र का जनक दादाभाई नौरोजी को कहा जा सकता है इनका जन्म 4 सितम्बर, 1825 को पारसी परिवार में हुआ। सन् 1855 में यह कामा एण्ड कम्पनी के प्रतिनिधि के रूप में इंग्लैण्ड गये सन् 1856 में ही वहाँ लन््दन के कॉलेज में अध्यापक हो गये । उन्होंने वहाँ लंदन इंडियन सोसायटी स्थापित की, जिसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को संगठित करना और भारत की समस्याओं का अध्ययन करना था । उन्होंने यूरोप के देशों की अर्थव्यवस्था का सूक्ष्म अध्ययन किया था। अपने जीवनकाल में बे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। सन् 1892 में वे हाऊस ऑफ कॉमर्स के सदस्य भी चुने गये । वे भारत में सुधार चाहते थे और उनका अनुमान था कि ब्रिटिश शासन को समझा-बुझाकर भारतीय समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कई लेख लिखे, लेकिन मुख्य,पुस्तक पावर्टी एण्ड अन ब्रिटिश रूल इन इण्डिया है। जो कि सन् 1901 में लंदन से प्रकाशित हुआ था। इस पुस्तक में उन्होंने भारत की तत्कालीन निर्धनता, उसके कारण एवं निवारण के उपायों का अंकों की सहायता से वर्णन किया था। पुस्तक में किसानों तथा मजदूरों की आय एवं वस्तुओं की कीमत आदि का विस्तृत वर्णन है। सन् 1917 में दादाभाई नौरोजी की मृत्यु हुई। दादाभाई नौरोजी ने भारत में विश्वविद्यालयों की स्थापना के पूर्व के दिनों में एलफिंस्टन इंस्टीटयूट में शिक्षा पाई जहाँ के ये मेधावी छात्र थे। उसी संस्थान में अध्यापक के रूप में जीवन आरंभ कर आगे चलकर वहीं वे गणित के प्रोफेसर हुए, जो उन दिनों भारतीयों के लिए शैक्षणिक संस्थाओं में सर्वोच्च पद था। साथ में उन्होंने समाजसुधार कार्यों में अग्रगामी और कई धार्मिक तथा साहित्य संघटनों के, यथा "स्टूडेंट्स लिटरेरी ऐंड सांइटिफिक सोसाइटी के, प्रतिष्ठाता के रूप में अपना विशेष स्थान बनाया। उसकी दो शाखाएँ थीं, एक मराठी ज्ञानप्रसारक मंडली और दूसरी गुजराती ज्ञानप्रसारक मंडली। रहनुमाई सभी की भी स्थापना इन्होंने की थी।' "रास्त गफ्तार' नामक अपने समय के समाज सुधारकों के प्रमुख पत्र का संपादन तथा संचालन भी इन्होंने किया। पारसियों के इतिहास में अपनी दानशीलता और प्रबुद्धता के लिए प्रसिद्ध "कैमास' बंधुओं ने दादाभाई को अपने व्यापार में भागीदार बनाने के लिए आमंत्रित किया। तदनुसार दादाभाई लंदन और लिवरपूल में उनका कार्यालय स्थापित करने के लिए इंग्लैंड गए। विद्यालय के वातावरण को छोड़कर एकाएक व्यापारी धन जाना एक प्रकार की अवनति या अपवतन समझा जा सकता है, परंतु दादा भाई ने इस अवसर को इंग्लैंड में उच्च शिक्षा के लिए जानेवाले विद्यार्थियों की भलाई के लिए उपयुक्त समझा। इसके साथ ही साथ उनका दूसरा उद्देश्य सरकारी प्रशासकीय संस्थाओं का अधिक से अधिक भारतीयकरण करने के लिए आंदोलन चलाने का भी था। जो विद्यार्थी उन दिनों उनके संपर्क में आए और उनसे प्रभावित हुए उनमें सुप्रसिद्ध फीरोजशाह मेहता, मोहनदास कर्मचंद गांधी और मुहम्मद अली जिना का नाम उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त दादाभाई का एक और उद्देश्य ब्रिटिश जनता को ब्रिटिश शासन से उत्पीड़ित भारतीयों के दु:खों की जानकारी कराना और उन्हें दूर करने के उनके उत्तरदायित्व की ओर ध्यान आकर्षित कराना भी था। उन दिनों भारतीय सिविल सेवाओं में सम्मिलित होने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए सबसे कठिनाई की बात यह थी कि उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में ब्रिटिश अभ्यर्थियों से स्पर्धा करनी पड़ती थी। इस असुविधा को दूर करने के लिए दादा भाई का सुझाव इंग्लैंड और भारत में एक साथ सिविल सर्विस परीक्षा करने का था। इसके लिए उन्होंने 1893 तक आंदोलन चलाया जब कि उन्होंने वहाँ लोकसभा (हाउस आव कामन्स) में उस सदन के एक सदस्य की हैसियत से अधिक संघर्ष किया और सभा ने भारत तथा इंग्लैंड में एक साथ परीक्षा चलाने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। उन दिनों दूसरी उससे भी बड़ी परिवेदना भारतीयों की भयानक दरिद्रता थी। हालाँकि दादाभाई ही पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने इसके लिए दुःख की अभिव्यक्ति की हो किंतु वे पहले व्यक्ति अवश्य थे जिन्होंने उसके उन्मूलन के लिए आंदोलन चलाया। उन्होंने तथ्यों और आँकड़ों से यह सिद्ध कर दिया कि जहाँ भारतीय दरिद्रता में आकंठ डूबे थे, वहीं भारत की प्रशासकीय सेवा दुनियाँ में सबसे महँगी थी। सरकारी आँकड़े उन दिनों नहीं के समान थे और जानकारी प्राप्त करने के लिए कोई गैर सरकारी साधन भी नहीं था। भारतीयों की आर्थिक स्थिति के संबंध में प्रारंभिक

Comments

Rate this episode

Episode Details

Author
Radio Azad
Show Type
full
Audio Format
audio/mpeg

We use analytics

We use Umami, a privacy-friendly analytics tool, to understand how visitors use this site. No personal data is collected and no data leaves our EU servers. You can accept or decline below. Privacy Policy